जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी किए जाने और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख को नया केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद भारत सरकार ने देश का नया नक्शा जारी किया है।
देश की जन्नत कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब दो केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं। भारत सरकार ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया था। 31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग राज्य अस्तित्व में आ गए। इसी के साथ राज्य में संसद के बने कई कानून लागू भी इन नए प्रदेशों में लागू हो गए। इसी बीच सरकार ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख का नया नक्शा जारी किया है। जिसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग दिखाया गया है।
औपचारिक रूप से 31 अक्टूबर, 2019 को अस्तित्व में आए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर और लद्दाख अब दो प्रशासकों के अधीन होंगे। इसके साथ ही भारत के आंतरिक नक्शे में भी बड़ा बदलाव हो चुका है। अब देश में नौ केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं, जो कि 30 अक्तूबर तक सात थे। वहीं राज्यों की संख्या अब 28 हो गई है। पहले यह संख्या 29 थी। लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है, लेकिन यहां विधानसभा नहीं होगी। जबकि जम्मू कश्मीर में विधानसभा कायम रहेगी।
विभाजन के बाद जहां जम्मू कश्मीर में 20 जिले अनंतनाग, बांदीपोरा, बारामुला, बड़गाम, डोडा, गांदरबल, जम्मू, कठुआ, किश्तवाड़, कुलगाम, पुंछ, कुपवाड़ा, पुलवामा, रामबन, रसाई, राजौरी, सांबा, शोपियां, श्रीनगर और उधमपुर आएँगे। वहीं लद्दाख में दो जिले लेह और कारगिल होंगे। लद्दाख की आबादी लेह और कारगिल जिलों के बीच आधे हिस्से में विभाजित हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार है, कारगिल की कुल जनसंख्या 140,802 है। इसमें 76.87 फीसदी आबादी मुस्लिम (ज्यादातर शिया) हैं। जबकि लेह की कुल जनसंख्या 133,487 है जिसमें 66.40 फीसदी बौद्ध हैं। लद्दाख की कुल जन संख्या 2,74,289 लाख है।
सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून लागू हो गया। इसके साथ ही दोनों प्रदेशों में कई बड़े बदलाव भी हो गए। जम्मू कश्मीर में पांच साल के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में निर्वाचित विधानसभा और मंत्रिपरिषद होगी। वहीं लद्दाख का शासन उपराज्यपाल के जरिए सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा चलाया जाएगा। दोनों के पास साझा उच्च न्यायालय होगा। लेकिन दोनों राज्यों के एडवोकेट जनरल अलग होंगे। लद्दाख अधिकारियों की नियुक्ति के लिए यूपीएससी के दायरे में आएगा। जम्मू कश्मीर में राजपत्रित सेवाओं के लिए भर्ती एजेंसी के तौर पर लोक सेवा आयोग बना रहेगा। दोनों प्रदेशों के सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार ही वेतन मिलेंगे।


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