छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के प्रोफेसर विनय पाठक (Prof Vinay Pathak) के खिलाफ चल रही सीबीआई की जांच के बावजूद उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार का खेल बदस्तूर जारी है। अब अनुशासनहीनता के आरोप में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र( Prof Pradeep Kumar Mishra )को हटा दिया गया है।
आनन-फानन में हुई जांच के बाद शनिवार देर शाम राजभवन ने इसे लेकर आदेश जारी किया है जिसमें उन्हें हटाकर शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुर्नवास विश्वविद्यालय से अटैच कर दिया गया है। AKTU में कुलपति का अतिरिक्त चार्ज लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University )के कुलपति ( Vice-Chancellor ) प्रो. आलोक कुमार राय ( Prof Alok Kumar Rai )को दे दिया गया है।गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में चल रहे भ्रष्टाचार का उदाहरण बन चुके कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति विनय पाठक AKTU में भी कुलपति रहे थे और उनके कार्यकाल के दौरान और उसके बाद भी उनपर कई तरह के आरोप लगाए गए थे, लेकिन गाज गिरी विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे प्रो. प्रदीप मिश्र ( Prof Pradeep Kumar Mishra )पर।
प्रो. पीके मिश्र का कहना है चूंकि उन्होंने प्रो. विनीत कंसल और परीक्षा नियंत्रक अनुराग त्रिपाठी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत की जांच कर कार्रवाई की थी, इसकी वजह से उन्हें हटाया गया।
AKTU में पिछले कुछ महीने से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। दरअसल, छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति और AKTU के पूर्व कुलपति प्रो. विनय पाठक के समय प्रो. विनीत कंसल निदेशक और परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी अनुराग त्रिपाठी संभाल रहे थे।
इसमें प्रो0 विनीत कंसल पर फर्जी तरीके से प्रोफेसर बनने के आरोप हैं। इस आरोप के आधार पर कुलपति प्रो0 पीके मिश्र ( Prof Pradeep Kumar Mishra )ने उन्हें नौ जनवरी 2023 को निदेशक के पद से हटा दिया। जबकि अनुराग त्रिपाठी पर गलत तरीके से परीक्षा संबंधित कार्य में कंपनी को ठेका दिलवाने और भुगतान कराने का आरोप है।
10 जनवरी को विश्वविद्यालय में कार्यपरिषद की बैठक हुई थी। कार्य परिषद में प्रो0 विनय पाठक भी सदस्य हैं। प्रो0 विनीत कंसल को आइईटी कालेज के निदेशक पद से हटाए जाने की कार्रवाई पर परिषद की मुहर लगनी थी लेकिन इस बैठक को रोकने का भी पूरा प्रयास किया गया। राजभवन की जांच में आरोप लगाया गया है कि प्रो0 पीके मिश्र ने बगैर कोरम पूरा किए कार्यपरिषद की बैठक की थी, जबकि कुलपति ने अपने जवाब में बताया था कि कार्यपरिषद में निर्धारित सदस्य मौजूद रहे।
उधर दो दिन पहले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की शिकायत का संज्ञान लेते हुए प्रो. विनय पाठक पर AKTU की ओर से जांच कमेटी गठित की गई। माना जा रहा है इस कमेटी के गठन के बाद से ही प्रो0 पीके मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटक गई थी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अवर सचिव डॉ0 नरेश कुमार शर्मा ने AKTU के पूर्व कुलपति प्रो0 विनय पाठक के खिलाफ की गई शिकायत पर AKTU से रिपोर्ट भेजने के लिए कहा था। इसके लिए अभी कुछ दिन पहले की AKTU ने प्रो0 विनय पाठक के खिलाफ जांच के लिए कमेटी गठित की थी।
प्रो0 विनय पाठक पर भर्ती, ई-कंसोर्टियम की जांच, गलत तरीके से 1700 करोड़ निवेश कराने, परीक्षा के गोपनीय कार्य के लिए 100 करोड़ का गलत भुगतान, फर्जी तरीके से पीएचडी करने, डॉ0 विनीत कंसल और अनुराग त्रिपाठी की प्रोफेसर पद पर फर्जी नियुक्ति और निर्माण कार्य में फर्जी भुगतान कराने का आरोप है।
प्रो0 विनय कुमार पाठक AKTU में लगातार 6 साल तक कुलपति रहे। इस दौरान उन्होंने 2 कार्यकाल पूरे किए। खास बात यह रही कि इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर भर्तियां की। इनमें फैकल्टी और निदेशक जैसे अहम पद भी शामिल रहे। प्रो0 विनय पाठक का रसूख इस कदर हावी रहा कि जब तक वह पद पर बने रहे तब तक किसी पर कोई कार्रवाई होती यह संभव नहीं था। बाद में जब वह यहां से कानपुर विश्वविद्यालय गए तो भी AKTU के BOG में शामिल रहे। इस बीच कानपुर जाने के बाद भी उनके बनाए गए अफसर पदों पर डटे रहे।
डॉ0 विनीत कंसल पाठक के कितने करीबी थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता हैं कि IET डायरेक्टर के अलावा वे AKTU के प्रति कुलपति भी रहे और प्रो0 विनय पाठक के कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए कुलपति के नियुक्ति तक उन्हें विश्वविद्यालय का प्रभारी कुलपति भी बनाया गया था।


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