उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh) में घोसी उपचुनाव (Ghosi By-Election ) में समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार सुधाकर सिंह ने 42759 वोटों के अंतर से सत्तारूढ़ दल भाजपा के प्रत्याशी दारा सिंह ( Dara Singh Chauhan ) को करारी शिकस्त दी है, और समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर अपना क़ब्ज़ा बरकरार रखा है। यह सीट दारा सिंह चौहान के इस्तीफ़ा देने के कारण खाली हुई थी। दारा सिंह चौहान 2022 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर घोसी से चुने गए थे।
घोसी विधानसभा उपचुनाव (Ghosi By-Election ) परिणाम ने मतदाताओं का रुख़ और नाराज़गी स्पष्ट कर दी है, मतदाताओं ने साफ़ बता दिया है कि अब दल बदलुओं के हर बार जीतने की कोई गारंटी नहीं। केंद्र और राज्य में क़ाबिज़ भाजपा सरकार के लिए ये ख़तरे की घंटी है, पार्टी को समझना होगा कि अगर कैडर से बाहर निकल कर दूसरे दलों से आये दलबदलू नेताओं पर भरोसा करेंगे और उन्हें अपना प्रत्याशी बनाएंगे तो मुँह की खानी पड़ सकती है। घोसी चुनाव परिणाम इस बात का स्पष्ट संकेत है। भाजपा समेत किसी भी दल के सगे नहीं रहे दारा सिंह चौहान को सपा से तोड़ कर लाना उत्तर प्रदेश भाजपा के लिये मंहगा साबित हुआ है ।
पार्टियां बदल कर चुनाव लड़ने के लिए मशहूर दारा सिंह चौहान ( Dara Singh Chauhan) ने सपा का विधायक रहते हुए विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था । वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा छोड़कर सपा में आये थे और विधायक चुने गये, लेकिन जब देखा कि सरकार भाजपा बना रही है, तो विधानसभा सदस्यता से इस्तीफ़ा दे भाजपा में शामिल हो गए थे। उनके इस्तीफ़े के बाद हुए इस उपचुनाव में वह भाजपा प्रत्याशी थे।
घोसी उप चुनाव (Ghosi By-Election ) में योगी और अखिलेश की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। भाजपा ने उपचुनाव में मंत्रियों की फौज उतार दी थी। भाजपा ने पिछड़ी जाति के वोटरों को साधने के लिए ओम प्रकाश राजभर को, निषाद वोटरों को साधने के लिए संजय निषाद, कुर्मी वोटरों को साधने के लिए एके शर्मा और स्वतंत्र देव सिंह, ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, मुस्लिम समाज के पसमांदा वोटरों को साधने के लिए दानिश आजाद अंसारी को घोसी के रण में उतारा था।
कुल 26 मंत्रियों और 60 से ज्यादा विधायकों ने दारा सिंह चौहान के लिए प्रचार किया. यहाँ तक कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ( Yogi Adityanath ) ने भी चुनावी जनसभा की, लेकिन दलबदलू उम्मीदवार के भरोसे सपा से यह सीट छीनने के भाजपा के प्रयास सफल नहीं हो सके। इस बार ख़ास बात यह भी रही कि जहां सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पूरे चुनाव में सक्रिय रूप से प्रचार करते नज़र आये, वहीं योगी आदित्यनाथ ने प्रचार अभियान के आख़िर में मोर्चा सम्भाला। अखिलेश से चाचा और सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव भी लगातार प्रचार अभियान में डटे रहे, जिसका लाभ अंततः सपा को हुआ।
दारा सिंह चौहान ( Dara Singh Chauhan) ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी से की थी। पार्टी ने उनके तेवर को पहचाना और तेजी से उनका ग्राफ बढ़ने लगा। अपनी राजनीतिक पकड़ के कारण वे पार्टी के एक महत्वपूर्ण चेहरा बन गए। बसपा ने पहली बार वर्ष 1996 में उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया। वर्ष 2000 में एक बार फिर वे राज्यसभा सदस्य बने।
राज्यसभा की सदस्यता से रिटायर होने के बाद बसपा ने उन्हें वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में घोसी लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतार दिया। जीत दर्ज कर वे लोकसभा तक का सफर तय करने में कामयाब हुए। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा कोई भी सीट जीत करने में कामयाब नहीं हुई। दारा सिंह चौहान ने इसके बाद पार्टी छोड़ने का मन बना लिया। वर्ष 2015 में वे भाजपा में शामिल हो गए।
भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में मधुबन विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। जीत दर्ज करने के बाद योगी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्हें वन, पर्यावरण एवं प्राणी उद्यान मंत्री बनाया गया। उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 से पहले उन्होंने एक बार फिर पार्टी बदलने का मन बनाया और 12 जनवरी 2022 को योगी कैबिनेट और भाजपा से इस्तीफा दे दिया। भाजपा से इस्तीफे के साथ ही वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। पार्टी ने उन्हें घोसी सीट से उम्मीदवार बनाया और एक बार फिर जीत दर्ज करने में वे कामयाब रहे।
घोसी विधानसभा सीट पर 6 साल के भीतर चौथी बार चुनाव हुए हैं। दिलचस्प है कि PDA (पिछड़ा, दलित अल्पसंख्यक) का नारा बुलंद करने वाली समाजवादी पार्टी ने क्षत्रिय बिरादरी के उम्मीदवार पर दांव लगाया था, जबकि बीजेपी ने ओर से दलबदल के लिए चर्चित रहे दारा सिंह चौहान पर दांव लगाया था।


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