भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) ने कहा कि राम मंदिर का बनना नियति ने तय किया था और इस महान कार्य के लिए उसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुना है। लालकृष्ण आडवाणी ने ‘राष्ट्र धर्म’ पत्रिका में अपने लेख में ये बातें लिखी है।
लालकृष्ण आडवाणी ( Lal Krishna Advani) ने अपने लेख ‘राम मंदिर निर्माण, एक दिव्य स्वप्न की पूर्ति’ में लिखा कि आज से 33 साल पहले निकाली गई रथ यात्रा अयोध्या आंदोलन का सबसे निर्णायक और परिवर्तनकारी घटना थी। लालकृष्ण आडवाणी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए लिखा कि वह अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के भव्य कार्यक्रम से पहले उनकी अनुपस्थिति महसूस कर रहे हैं।
भाजपा के दिग्गज भाजपा नेता नेता लालकृष्ण आडवाणी ( Lal Krishna Advani) ने राष्ट्र धर्म पत्रिका के विशेष संस्करण में लिखे अपने लेख में ये बातें कहीं। लेख 16 जनवरी को प्रकाशित होगा।पत्रिका के विशेष संस्करण की कॉपी उन सभी लोगों को दी जाएगी जो अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होंगे। आडवाणी ने इस क्षण को लाने, रामलला का भव्य मंदिर बनाने और अपने संकल्प को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है।
लेख में आडवाणी ने लिखा- आज रथयात्रा को 33 साल पूरे हो गए। जब हमने 25 सितंबर, 1990 की सुबह रथ यात्रा शुरू की, तो हमें नहीं पता था कि भगवान राम के प्रति जिस आस्था के साथ हम यह यात्रा शुरू कर रहे हैं, वह देश में एक आंदोलन का रूप ले लेगी।
लालकृष्ण आडवाणी ( Lal Krishna Advani) अपनी रथयात्रा के अविस्मरणीय पल को याद करते हुये कहते हैं कि रथयात्रा को आज करीब 33 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। 25 सितंबर, 1990 की सुबह रथयात्रा आरम्भ करते समय हमें यह नहीं पता था कि प्रभु राम की जिस आस्था से प्रेरित होकर यह यात्रा आरम्भ की जा रही है, वह देश में आंदोलन का रूप ले लेगा। उस समय वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सहायक थे। वे पूरी रथयात्रा में उनके साथ ही रहे। तब वे ज्यादा चर्चित नहीं थे। मगर राम ने अपने अनन्य भक्त को उस समय ही उनके मंदिर के जीर्णोद्धार के लिये चुन लिया था। आडवाणी जी स्वयं भी ऐसा मानते हैं कि उनकी राजनीतिक यात्रा में अयोध्या आंदोलन सबसे निर्णायक परिवर्तनकारी घटना थी, जिसने उन्हें भारत को पुन: जानने और इस प्रक्रिया में अपने आपको भी फिर से समझने का अवसर दिया है।
उस समय मुझे लगा कि नियति ने तय कर लिया है कि एक दिन अयोध्या में श्री राम का भव्य मंदिर जरूर बनेगा। अब यह केवल समय की बात है। अयोध्या में राम मंदिर का प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को आयोजित किया जाना है।
रथयात्रा के दौरान कई ऐसे अनुभव हुए जिन्होंने मेरे जीवन को प्रभावित किया। दूर-दराज के गांवों से अनजान लोग रथ को देखकर भाव-विभोर होकर मेरे पास आते थे। वे प्रणाम करते, भगवान राम का नाम जपते और चले जाते। ये संदेश था कि राम मंदिर का सपना देखने वाले बहुत से लोग हैं। 22 जनवरी को मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ उन ग्रामीणों की दबी हुई इच्छाएं भी पूरी हो जाएंगी।


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