मेघालय ( Meghalaya ) में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और उसके दो साथियों के खिलाफ चर्च (Church)में जय श्री राम का नारा लगाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। इन्फ्लुएंसर का नाम आकाश सागर है। उसने नारे लगाने का वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया था, जहां उनके 1.5 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। घटना 26 दिसंबर की है।
वीडियो में आकाश मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में स्थित मावलिन्नॉन्ग के चर्च ऑफ एपिफनी(Church of Epiphany) में अपने साथियों के साथ दिखाई दे रहा है। इस दौरान वह चर्च के वेदी (altar) में माइक पर धार्मिक नारा लगा रहा है और उसके 2 साथी बेंच पर बैठकर ये सुन रहे हैं। इनके अलावा एक व्यक्ति वीडियो बना रहा है। हालांकि, घटना के समय चर्च में कोई नजर नहीं आ रहा है।
मामले को लेकर शिलॉन्ग की एक्टिविस्ट एंजेला रंगद ने लैटुमखरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने इस घटना को जानबूझकर और सोची-समझी साजिश बताया। एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया कि इस हरकत का उद्देश्य ईसाई धर्म और चर्च की पवित्रता का अपमान करना और धार्मिक सौहार्द वाले इलाके में साम्प्रदायिक तनाव फैलाना था।
राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा (Conrad Sangma ) ने भी घटना को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, ‘आरोपियों ने राज्य का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। इस मामले में पुलिस को कानूनी कार्रवाई करने के आदेश दे दिए गए हैं।’
राज्य के हिंदू संगठन सेंट्रल पूजा कमेटी (CPC) ने भी इस घटना की निंदा की है। CPC के अध्यक्ष नब भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘हमें सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो को देखकर दुख हुआ। इस घटना ने मेघालय जैसे शांतिप्रिय राज्य में सभी की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। हम आरोपी के कृत्य की निंदा करते हैं और पुलिस से कानूनी कार्रवाई करने की मांग करते हैं।’
शिकायत के बाद, मेघालय पुलिस ने आकाश सागर और उसके साथियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। उन पर चर्च (Church) में गैरकानूनी तरीके से प्रवेश करने, सार्वजनिक शांति भंग करने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप लगे हैं। आरोपियों की तलाश जारी है।
एफआईआर के जवाब में, आकाश सागर ने आरोपों को खारिज करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया. अब हटाए जा चुके एक पोस्ट में आकाश ने शिकायत के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा “जय श्री राम कहने के लिए?” उसने एफआईआर की रिपोर्ट करने वाले न्यूज आर्टिकल का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया और कहा कि जो इसे गलत बोल रहे हैं वे देशद्रोही की तरह काम कर रहे हैं।
आकाश ने एक अलग मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देकर अपने कार्यों को सही ठहराने का प्रयास किया, जिसमें एक मस्जिद के अंदर धार्मिक नारे लगाने के आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को खारिज कर दिया गया था।



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