Tuesday, June 23, 2026

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Janmashtami 2025:शंखनाद घंटे-घड़ियाल की मंगलध्वनि के बीच के बीच मथुरा में प्रकट हुए “भगवान श्रीकृष्ण”; 1008 कमल पुष्पों से अर्चन, 5 क्विंटल पंचामृत से अभिषेक हुआ

Lord Shri Krishna appeared in Mathura amidst the auspicious sounds of blowing conches and bells

)  में भाद्र पक्ष की जन्माष्टमी ( Janmashtami)  की अर्धरात्रि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हो गया है। मथुरा  में श्री कृष्ण जन्मस्थान पर नंदलाल का 1008 कमल पुष्पों से अर्चन किया गया। 11 बजकर 55 मिनट पर 5 मिनट के लिए पट बंद कर दिए गए थे। 12 बजकर 5 मिनट पर भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा को गर्भ गृह से बाहर लाया गया।

श्रीकृष्ण  ( )  पर रात के 12:00 बजते ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ढोल-नगाडे़, झांझ-मंजीरे और मृदंग की आवाज गूंज उठी। भगवान के प्राकट्योत्सव की खुशी में भक्त झूमने लगे। मंदिर के कोने-कोने में कृष्ण कन्हैया की जय-जयकार होने लगी।

मथुरा ( Mathura) में  नटवर नागर के जन्मोत्सव के लाखों श्रद्धालु साक्षी बने। अजन्मे के जन्म पर मंत्रोच्चारण के बीच शंखनाद हुआ, तो मानो ब्रज की लता-पता भी झूम उठीं। देवकीनंदन के जन्मोत्सव पर मानो ब्रज का कण-कण धन्य हो गया। गोकुल सहित पूरे ब्रज के मंदिरों में प्रगट भये गोपाला… और बधाई गीतों से माहौल भक्तिमय हो गया।

सोने से सजी चांदी की कामधेनु गाय के दूध से भगवान कृष्ण का अभिषेक किया गया। इसके बाद भगवान को चांदी के कमल पर बिठाकर 5 क्विंटल पंचामृत से स्नान कराया गया।जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा में सोमवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। देश और दुनिया से आए श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचकर कान्हा के दर्शन किए।

वहीं, वृंदावन में भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव ( Janmashtami) की धूम है। जन्मस्थान के बाहर भारी भीड़ लगी है। देशभर से लोग यहां आए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस समय 30 लाख से ज्यादा श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन में मौजूद हैं।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ठाकुरजी को अर्पित होने वाली पोशाक को 6 महीने में मथुरा के कारीगरों ने तैयार किया है। इसमें सोने-चांदी के तारों का इस्तेमाल किया गया है। कपड़े में इंद्रधनुष के 7 रंगों को रखा गया है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम पर सजाया गया है। जिस फूल बंगला में ठाकुरजी विराजे हैं, उसे सिंदूरी फूलों से सजाया गया है। ये फूल कोलकाता और बेंगलुरु से मंगाए गए हैं।

जन्मोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता, ब्रज की लोक कला और संस्कृति का व्यापक प्रदर्शन रहा। उत्सव को खास बनाने के लिए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा पूरे ब्रज क्षेत्र में 21 छोटे और 5 बड़े मंच बनाए गए थे। इन मंचों पर ब्रज क्षेत्र से आए करीब 400 कलाकारों की टोलियों ने रास, भजन, नृत्य और श्रीकृष्ण की जन्म लीलाओं का मनमोहक मंचन किया।

इसके साथ ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान से जुड़े सभी रास्तों पर स्ट्रीट परफॉर्मर ग्रुप अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। बीन, सारंगी, डमरू, ढप, ढोल, मजीरा और नगाड़े की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। बहरूपिया जैसे पारंपरिक कलाकार भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने।

शंखनाद घंटे-घड़ियाल की मंगलध्वनि के बीच के बीच मथुरा में प्रकट हुए “भगवान श्रीकृष्ण”

Jaba Upadhyay

Jaba Upadhyay is a senior journalist with experience of over 15 years. She has worked with Rajasthan Patrika Jaipur and currently works with The Pioneer, Hindi.