भाजपा के सीनियर नेता विजय कुमार मल्होत्रा (Vijay Kumar Malhotra) का मंगलवार सुबह 93 साल की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से दिल्ली AIIMS में भर्ती थे। AIIMS ने आज सुबह उनकी मौत की जानकारी दी। पिछले कुछ दिन से दिल्ली एम्स में उनका इलाज चल रहा था जहां आज सुबह लगभग 6 बजे उन्होंने 94 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा के निधन पर मंगलवार को दुख व्यक्त किया। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली भाजपा के पहले अध्यक्ष रहे प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा का मंगलवार को निधन हो गया।
उनके निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। दिल्ली भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा सहित अन्य नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। मल्होत्रा ने अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के साथ संघ से निकलकर जनसंघ के जरिए राजनीति में कदम रखा था। मल्होत्रा ने दिल्ली में संघ की विचारधारा के विस्तार के लिए जनसंघ काल से बहुत काम किया।
वह पिछले 45 वर्षों से दिल्ली से 5 बार सांसद और 2 बार विधायक रहे। उनका नाम दिल्ली बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शुमार किया जाता रहा है। उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक जीत 1999 के आम चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारी अंतर से हराना था।
2004 के आम चुनाव में, मल्होत्रा दिल्ली में अपनी सीट जीतने वाले एकमात्र बीजेपी उम्मीदवार थे, जबकि कांग्रेस ने अन्य 6 सीटें जीती थीं। मल्होत्रा ने अपने पूरे कार्यकाल में एक बेदाग छवि वाले नेता के रूप में जाने गए।
26 सितंबर 2008 को बीजेपी ने घोषणा की विजय कुमार मल्होत्रा (Vijay Kumar Malhotra) 2008 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। मल्होत्रा ने ग्रेटर कैलाश सीट आसानी से जीत ली, लेकिन बीजेपी शीला दीक्षित सरकार को गिराने में नाकाम रही। चुनाव परिणाम घोषित होने के कुछ ही दिनों बाद, मल्होत्रा लोकसभा में नजर आए, जिससे यह अटकलें तेज हो गईं कि वह दिल्ली विधानसभा में सेवा देने के बजाय संसद में बने रहना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने बाद में संसद सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली में अपनी विधायक सीट बरकरार रखी और विपक्ष के नेता की भूमिका निभाई।
3 दिसंबर 1931 को लाहौर में जन्मे विजय कुमार मल्होत्रा (Vijay Kumar Malhotra) डॉ. खजान चंद मल्होत्रा और सुशीला देवी के सबसे बड़े बेटे थे। उनके पिता प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य थे, जबकि मां आर्य समाज की कार्यकर्ता रहीं। सात बच्चों वाले इस परिवार में समानता और शिक्षा पर खास जोर था। मल्होत्रा बचपन से ही मेधावी छात्र रहे। गणित में अद्भुत प्रतिभा के कारण उन्हें दो बार स्कूल में प्रमोशन मिला और सिर्फ 18 साल की उम्र में ग्रेजुएशन पूरी की। उन्होंने लाहौर के डीएवी कॉलेज और दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से पढ़ाई की। वे हिंदी में एम.ए. और डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। उनका शोध विषय कवि सोहन लाल द्विवेदी और उनकी रचनाएं रहीं। राजनीति और सामाजिक कार्यों के अलावा, मल्होत्रा दिल्ली में शतरंज और तीरंदाजी क्लबों के प्रशासन से भी जुड़े रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज में वे 35 साल तक हिंदी के प्रोफेसररहे।


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