Tuesday, June 23, 2026

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Maharashtra :स्कूल लेट आने की खौफनाक सजा:13 साल की बच्ची को स्कूल बैग टांगकर 100 उठक-बैठक कराई, इलाज के दौरान मौत

Class 6 Girl Forced To Do 100 Sit-Ups with bag For Being Late To School, Dies

    के वसई में एक दुखी करने वाला मामला सामने आया है। दरअसल यहां एक स्कूल School  में 10 मिनट देरी से आने पर अध्यापक ने 13 साल की बच्ची को बैग कंधे पर टांगकर 100 उठक-बैठक करने की सजा दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे बच्ची की तबीयत खराब हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल में इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मृतक लड़की की मां ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी की मौत उसकी शिक्षिका द्वारा दी गई “अमानवीय सजा” के परिणामस्वरूप हुई, जिसने उसे स्कूल बैग पीठ पर रखकर उठक-बैठक करने को कहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना 8 नवंबर की है, जब वसई के श्री हनुमंत विद्या मंदिर में कक्षा 6 में पढ़ने वाली कक्षा छह की छात्रा
अंशिका गौड़ को देरी से स्कूल आने पर अध्यापक ने सौ उठक-बैठक लगाने की सजा दी। उठक-बैठक लगाने के बाद अंशिका के कमर में दर्द होने लगा। बच्ची की मां ने बताया कि स्कूल School  से आने के बाद उसने तबीयत खराब होने की शिकायत की। इसके बाद उसे वसई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे एक अन्य अस्पताल में और फिर जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को इलाज के दौरान बच्ची की जेजे अस्पताल में मौत हो गई।
बच्ची की मां ने अध्यापक और स्कूल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए पुलिस में मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने फिलहाल दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज कर लिया है और अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद धाराएं बदली जा सकती हैं। इस मामले में मनसे की भी एंट्री हो गई है। मनसे कार्यकर्ताओं ने घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल पहुंचकर स्कूल में ताला लगा दिया।
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, मृतक लड़की की मां ने कहा कि शारीरिक दंड दिए जाने के बाद उनकी बेटी की स्वास्थ्य स्थिति तेजी से बिगड़ गई।उन्होंने कहा, “सजा के बाद, उसकी गर्दन और पीठ में भयंकर दर्द हुआ और वह उठ नहीं सकी।”महिला ने बताया कि जब उसे घटना और अपनी बेटी की हालत के बारे में पता चला तो वह स्कूल School  गई और शिक्षक से शिकायत की।

उन्होंने कहा, “मुझे बताया गया कि छात्रों को स्कूल देर से आने के लिए दंडित किया गया था। शिक्षक ने दंड को उचित ठहराते हुए कहा कि अभिभावक उन पर आरोप लगाते हैं कि वे फीस देने के बावजूद छात्रों को नहीं पढ़ा रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “मैंने शिक्षक से कहा कि छात्रों को सज़ा देने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें पीठ पर बैग रखकर उठक-बैठक करने के लिए मजबूर किया जाए। शिक्षक ने मेरी बेटी को अमानवीय सजा दी, जिससे उसकी मौत हो गई।”

Jaba Upadhyay

Jaba Upadhyay is a senior journalist with experience of over 15 years. She has worked with Rajasthan Patrika Jaipur and currently works with The Pioneer, Hindi.