2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कांग्रेस का ‘गांधी परिवार‘ कितनी नफरत करता है, यह सार्वजनिक हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस की महासचिव प्रियंका वाड्रा गांधी, सोनिया गांधी के भाषण संकलनों को देखा जाये तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनके केंद्र बिंदु में 90 फीसदी रहे हैं।आलोचना करना, प्रधानमंत्री की गलत नीतियों की निन्दा करना एक जिम्मेवार विपक्ष का काम है, करनी भी चाहिए लेकिन लोकसभा चुनाव शुरू होने से पहले और अब समाप्ति पर है, तब देश के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री को इतनी गालियां चुनाव प्रचार के दौरान नहीं दी गयी होंगी। अभद्र भाषा, गाली-गलौज की जैसे मुहिम कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ चला रखी हो, इस तरह का वातावरण देश में देखने को मिला है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो टीवी चैनल के इंटरव्यू में साफ कर दिया कि वह मोदी की छवि को खराब करने के लिए जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं। वहीं उनकी बहन प्रियंका वाड्रा गांधी जिनमें कांग्रेसी राजनीतिक सफलताओं का बहुत बड़ा स्कोप देख रहे हैं, उनके विचार भी देश के प्रधानमंत्री के प्रति शालीन नजर नहीं आते। वह चुनाव प्रचार के दौरान अमेठी में छोटे छोटे बच्चों का प्रयोग कर प्रधानमंत्री को चोर और अभद्र गालियों वाले नारों के बीच मुस्कराती नजर आती हैं और कांग्रेस अध्यक्ष तो प्रधानमंत्री को हर एक घण्टे में कम से कम दस बार ‘चोर‘ कहकर पुकारते हैं।
उन्होंने तो सुप्रीम कोर्ट को भी लपेटे में ले लिया और कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि चौकीदार (प्रधानमंत्री) चोर है। जब फंस गये हैं तो अब माफी मांग रहे हैं।
इसी तरह प्रियंका वाड्रा गांधी मीडिया से राजनैतिक सम्भावनाओं के संदर्भ में कहती हैं कि वह मर जाना पसन्द करेंगी, लेकिन मोदी एंव भाजपा की मदद की सोच भी नहीं सकतीं।
यूपीए के चेयरपर्सन सोनिया गांधी के विचार देश पहले सुन ही चुका है। उन्होंने नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर तक कह चुकी हैं। आखिर लोकतांत्रिक देश में देश के प्रधानमंत्री को बेईज्जत करना, गालियां देना किसी राजनैतिक दल का कितना बड़ा एजेंडा हो सकता है, यह कांग्रेस ने करके दिखा दिया है।

अब सवाल उठता है कि देश के प्रधानमंत्री को एक के बाद एक गालियों के संग्रह में से कांग्रेस निकाल निकाल कर गालियां दे रही है। यही स्थिति कांग्रेस के प्रधानमंत्री रहते कोई दूसरा विपक्षी दल कर रहा होता तो उसका क्या हश्र होता। इसके लिए कांग्रेस की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उदाहरण हैं। जब उनको न्यायपालिका ने ललकारा तो उन्होंने न्यायपालिका की ही गर्दन मरोड़ दी और जब उनकी हत्या हुयी तो एक चंद हत्यारों के नाम पर पूरी कौम को निशाने पर ले लिया गया। हजारों लोगों का कत्लेआम बदले में कर दिया गया। कांग्रेस के गांधी परिवार को कोई चुनौती दे तो यह इनको बर्दाश्त नहीं है और इसी बीमारी के कारण प्रधानमंत्री कांग्रेस के निशाने पर हैं जिसमें संयम, प्रोटोकॉल, नैतिकता, सब पीछे छूट गयी है


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