उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh) में एटा (Etah ) जिले के जलेसर क्षेत्र में पटना पक्षी विहार ( Patna Bird Sanctuary ) में महाभारतकालीन महादेव का मंदिर है। यहां आने वाले भक्तों की इच्छा पूरी होती हैं । इसलिए भक्त इन्हें इच्छेश्वर महादेव ( Ichheswar Mahadev Temple )के नाम से पुकारते हैं।
एटा जिला मुख्यालय 47 किमी दूर जलेसर तहसील में खजूर के घने वृक्षों से आच्छादित पटना पक्षी विहार में स्थिति भग़वान शिव का मंदिर ( Ichheswar Mahadev Temple )श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केन्द्र है।पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत युग में मगध के राजा जरासंध (Jarasandha )ने इस मंदिर की स्थापना उस समय की, जब भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया था। भगवान श्रीकृष्ण से बदला लेने के लिए मगध का राजा छिपकर यहां रहता था। राजा भगवान शिव शंकर का बड़ा भक्त था और उनकी पूजा-अर्चना के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया था।
श्री पूर्ण इच्छेश्वर महादेव मंदिर ( Ichheswar Mahadev Temple ) है, जहां की स्वयं- भू शिवलिंग का उल्लेख ‘भारत के प्राचीन शिवालय’ पुस्तक में है। इस पूर्ण इच्छेश्वर महादेव की विशेषता है कि भूमि के ऊपर तीन फुट दिखने वाली अद्भुत शिवलिंग की गहराई की कोई थाह नहीं है।
कहते हैं कि शिवलिंग को बाहों में भरने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है, लेकिन अहंकार में कोई बाहुबली भी शिवलिंग को बाहुपाश में नहीं ले सकता है, जबकि श्रद्धा व भक्ति से बच्चा भी आलिंगनबद्ध कर लेता है।
जलेसर तहसील के पटना गांव के आसपास सैकड़ों बीघा जमीन में घना जंगल फैला हुआ है। यहां विशाल झील भी है, जिसे पक्षी पटना पक्षी विहार के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि यह मगध के सम्राट जरासंध के मित्र कालिया का वन था। यहां उसका महल था। इसलिए यह स्थान राजा कालिया वन के नाम से भी जाना जाता है। जरासंध ने श्रीकृष्ण और बलराम को मारने के लिए 17 बार आक्रमण किया था। जरासंध मगध राज्य का राजा था। कंस वध के बाद जरासंध श्रीकृष्ण को अपना परम शत्रु मानने लगा था। वह किसी भी तरह उन्हें पराजित करना चाहता था।
पौराणिक कथाओं एवं किदविंतियों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी स्थल पर मौजूद विशाल झील में कालिया नामक दैत्य का वध किया था। इसके बाद उन्होंने रुक्मणी के साथ विवाह किया था। मुगलों के शासन में इस मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया गया था। मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को तोपों से निशाना बनाया, लेकिन मंदिर में स्थापित शिवलिंग को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका। पटना पक्षी विहार मेंखजूरों के वन के नीचे खुदाई के दौरान सिक्के पुरातत्व विभाग मिले थे ।यह द्वापर युग की सभ्यता से संबधित थे ।लेकिन वन विभाग वन्य क्षेत्र होने के कारण यहां फिर कभी नहीं करने दी।


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