राजस्थान ( Rajasthan ) के उदयपुर (Udaipur ) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ( Mohan Bhagwat)ने रविवार को विद्या निकेतन में आयोजित प्रबुद्धजन गोष्ठी को संबोधित किया। डॉ. भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों द्वारा कोरोनाकाल में किया गया नि:स्वार्थ सेवा कार्य ही हिन्दुत्व है। इसमें सर्वकल्याण का भाव निहित है। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र के परम वैभव में विश्व का ही कल्याण संभव है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ( Rashtriya Swayamsevak Sangh) के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने अनुभव किया था कि दिखने में जो भारत की विविधता है, उसके मूल में एकता का भाव है। युगों से इस पुण्य भूमि पर रहने वाले पूर्वजों के वंशज हम सभी हिंदू हैं। यही भाव हिंदुत्व है। सोमवार को संघ प्रमुख भीलवाड़ा प्रवास पर रहेंगे, जहां वे तेरापंथ आचार्य महाश्रमण से भेंट करेंगे।
उदयपुर के गणमान्य नागरिकों को संघ के उद्देश्य, विचार व कार्य पद्धति के विषय पर प्रकाश डालते हुए सरसंघचालक ने कहा कि संघ का लक्ष्य व्यक्ति निर्माण है। व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण, समाज निर्माण से देश निर्माण संभव है। संघ विश्व बंधुत्व की भावना से कार्य करता है। संघ के लिए समस्त विश्व अपना है।
मोहन भागवत ( Mohan Bhagwat) कहा कि संघ को नाम कमाने की लालसा नहीं है। क्रेडिट, लोकप्रियता संघ को नहीं चाहिए। 80 के दशक तक हिंदू शब्द से भी सार्वजनिक परहेज किया जाता था। संघ ने इस विपरीत परिस्थिति में भी कार्य किया। प्रारंभिक काल की साधनहीनता के बावजूद संघ आज विश्व के सबसे बड़े संगठन के रूप में है। संघ प्रमाणिक रूप से कार्य करने वाले विश्वसनीय, कथनी करनी में अंतर न रखने वाले समाज के विश्वासपात्र लोगों का संगठन है। सभी हिंदू हमारे बंधु हैं। यही संघ है। संघ की शाखा, संघ के स्वयंसेवक यही संघ है।
सरसंघचालक डॉ. भागवत ( Mohan Bhagwat)ने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार का जिक्र करते हुए कहा- वे कहते थे, हिन्दू समाज का संगठन भारत की समस्त समस्याओं का समाधान कर सकता है। जहां-जहां विभिन्न कारणों से हिन्दू जनसंख्या कम हुई है, वहां समस्याएं उत्पन हुई हैं। इसलिए हिंदू संगठन सर्वव्यापी बन कर विश्व कल्याण की ही बात करेगा। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र के परम वैभव में विश्व का ही कल्याण होगा। इससे पूर्व सरसंघचालक डॉ. भागवत, राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्रीय संघचालक रमेशचंद अग्रवाल व महानगर संघचालक गोविन्द अग्रवाल ने भारत माता की प्रतिमा के सामने दीप जलाया।
जिज्ञासा सत्र में सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कई प्रश्नों के उत्तर भी दिए। मीडिया में संघ की छवि के बारे में प्रश्न पर उन्होंने कहा कि प्रचार हमारा उद्देश्य नहीं रहा है। प्रसिद्धि नहीं, अहंकार रहित, स्वार्थ रहित, संस्कारित स्वयंसेवक और कार्य प्राथमिक उद्देश्य है। प्रचार के क्षेत्र में इसीलिए देरी से आना हुआ। कार्य करने का ढिंढोरा संघ नहीं पीटता। कार्य होगा तो बिना कहे भी प्रचार हो जाएगा। संघ अनावश्यक प्रचार की स्पर्धा में शामिल नहीं है। फिर भी प्रचार विभाग आगे बढ़ रहा है और धीरे-धीरे गति प्राप्त कर रहा है।


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