Tuesday, June 23, 2026

Delhi, INDIA, News

79वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं-ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ मानवता की लड़ाई में एक उदाहरण के रूप में इतिहास में दर्ज किया जाएगा

Operation Sindoor will go down in history as an example in humanity’s fight against terrorism, says Prez Murmu

राष्ट्रपति  (President   ) ने 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर हमारे लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है। हमने लोकतंत्र पर आधारित ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया। जिससे लोकतांत्रिक कार्यशैली को मजबूती मिली। हमारे लिए हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि है।

79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President  Draupadi Murmu )ने पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा- प्यारे देशवासियों इस वर्ष, हमें आतंकवाद का दंश झेलना पड़ा। कश्मीर घूमने गए निर्दोष नागरिकों की हत्या, कायरतापूर्ण और नितांत अमानवीय थी। इसका जवाब भारत ने, फौलादी संकल्प के साथ निर्णायक तरीके से दिया।

राष्ट्रपति मुर्मू (President  Draupadi Murmu )ने आगे कहा- ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया कि जब राष्ट्र की सुरक्षा का प्रश्न सामने आता है तब हमारे सशस्त्र बल किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम सिद्ध होते हैं। रणनीतिक स्पष्टता और तकनीकी दक्षता के साथ, हमारी सेना ने सीमा पार के आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया। मेरा विश्वास है कि ऑपरेशन सिंदूर, आतंकवाद के विरुद्ध मानवता की लड़ाई में एक मिसाल के तौर पर इतिहास में दर्ज होगा।

इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा- हमारी एकता ही हमारी जवाबी कार्रवाई की सबसे बड़ी विशेषता थी। यही एकता, उन सभी तत्वों के लिए सबसे करारा जवाब भी है जो हमें विभाजित देखना चाहते हैं। भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट करने के लिए, कई देशों में गए संसद-सदस्यों के बहुदलीय प्रतिनिधि-मंडलों में भी हमारी यही एकता दिखाई दी। विश्व-समुदाय ने, भारत की इस नीति का संज्ञान लिया है कि हम आक्रमणकारी तो नहीं बनेंगे, लेकिन अपने नागरिकों की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई करने में तनिक भी संकोच नहीं करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा- ऑपरेशन सिंदूर, प्रतिरक्षा के क्षेत्र में, ‘आत्मनिर्भर भारत मिशन’ की परीक्षा का भी अवसर था। अब यह सिद्ध हो गया है कि हम सही रास्ते पर हैं। हमारा स्वदेशी विनिर्माण उस निर्णायक स्तर पर पहुंच गया है जहां हम अपनी बहुत सी सुरक्षा-आवश्यकताओं को पूरा करने में भी आत्मनिर्भर बन गए हैं। ये उपलब्धियां स्वाधीन भारत के रक्षा इतिहास में एक नए अध्याय का सूत्रपात हैं।

इस दौरान राष्ट्रपति (President  Draupadi Murmu )ने कहा कि भारत-भूमि, विश्व के प्राचीनतम गणराज्यों की धरती रही है। इसे लोकतंत्र की जननी कहना सर्वथा उचित है। हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर, हमारे लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है। हमने लोकतंत्र पर आधारित ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया जिनसे लोकतांत्रिक कार्यशैली को मजबूती मिली। हमारे लिए, हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि हैं।

राष्ट्रपति ने कहा- अतीत को देखते हुए, हमें देश के विभाजन से हुई पीड़ा को कदापि नहीं भूलना चाहिए। आज हमने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया। विभाजन के कारण भयावह हिंसा देखी गई और लाखों लोगों को विस्थापित होने के लिए मजबूर किया गया। आज हम इतिहास की गलतियों के शिकार हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे कहा, प्यारे देशवासियों, हमारे संविधान में ऐसे चार मूल्यों का उल्लेख है, जो हमारे लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाए रखने वाले चार स्तंभ हैं। ये मूल्य हैं- न्याय, स्वतंत्रतता,समता और बंधुत्व। ये हमारी सभ्यता के ऐसे सिद्धांत हैं, जिन्हें हमने स्वाधीनता संग्राम के दौरान पुन: जीवंत बनाया। मेरा मानना है कि इन सभी मूल्यों के मूल में व्यक्ति की गरिमा की अवधारणा विद्यमान है।

इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा- प्रत्येक व्यक्ति समान है और सभी को यह अधिकार है कि उनके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार हो। स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा-सुविधाओं तक, सभी की समान पहुंच होनी चाहिए। सभी को समान अवसर मिलने चाहिए। जो लोग पारंपरिक व्यवस्था के कारण वंचित रह गए थे। उन्हें मदद की जरूरत थी। इन सिद्धांतों को सर्वोपरि रखते हुए हमने 1947 में हमने एक नई यात्रा शुरू की।

विश्व में भारत की बढ़ती छवि को लेकर राष्ट्रपति ने कहा- पिछले वित्त वर्ष में 6.5 फीसदी की सकल-घरेलू उत्पाद वृद्धि दर के साथ भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश है। वैश्विक अर्थव्यसव्था में व्याप्त समस्याओं के बावजूद घरेलू मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बना हुआ है। निर्यात बढ़ रहा है। सभी प्रमुख संकेतक, अर्थव्यवस्था के मजबूत स्थिति को दर्शा रहे हैं। यह हमारे श्रमिक और किसान भाई-बहनों की कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ-साथ, सुविचारित सुधारों और कुशल आर्थिक प्रबंधन का परिणाम है।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा- सुशासन के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। सरकार गरीबों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। जो लोग गरीबी रेखा से ऊपर तो आ गए हैं, लेकिन मजबूत स्थिति नहीं हैं, उनको भी ऐसी योजनाओं की सुरक्षा उपलब्ध है, ताकि वे फिर से गरीबी रेखा से नीचे न चले जाएं। ये कल्याणकारी प्रयास सामाजिक सेवाओं पर बढ़ते खर्च में परिलक्षित होते हैं। आय की असमानता कम हो रही है, क्षेत्रीय असमानताएं भी कम हो रही हैं। जो राज्य और क्षेत्र पहले कमजोर आर्थिक प्रदर्शन के लिए जाने जाते थे, वे अब अपनी वास्तविक क्षमता प्रदर्शित कर रहे हैं और अग्रणी राज्यों के साथ बराबरी करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इस दौरान राष्ट्रपति ने कश्मीर के विकास पर कहा कि कश्मीर घाटी में रेल-संपर्क का शुभांरभ करना, एक प्रमुख उपलब्धि है। शेष भारत के साथ घाटी का रेल संपर्क उस क्षेत्र में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगा और नई आर्थिक संभावनाओं के द्वार खोलेगा। कश्मीर में इंजीनियरिंग की यह असाधारण उपलब्धि हमारे देश के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

 

Vijay Upadhyay

Vijay Upadhyay is a career journalist with 23 years of experience in various English & Hindi national dailies. He has worked with UNI, DD/AIR & The Pioneer, among other national newspapers. He currently heads the United News Room, a news agency engaged in providing local news content to national newspapers and television news channels