बांग्लादेश (Bangladesh ) की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘हम बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से संपर्क बनाए रखेंगे।’ विदेश मंत्रालय ने ये प्रतिक्रिया बांग्लादेश की तरफ से आए उस बयान के बाद दी जिसमें पड़ोसी देश ने कहा है कि शेख हसीना को सुनाई गई सजा के बाद उन्हें तत्काल प्रत्यर्पित करना ‘भारत का अनिवार्य कर्तव्य’ है। बांग्लादेश ने मौत की सजा का फैसला पारित होने के बाद शेख हसीना और उनके सहयोगी देश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को तत्काल प्रत्यर्पित करने की मांग की।
गौरतलब है कि सोमवार को बांग्लादेश (Bangladesh ) में जब न्यायाधिकरण में तीन जजों की पीठ ने जब सजा-ए-मौत का एलान किया तो उसके बाद पड़ोसी देश में हसीना के समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। बांग्लादेश में उपजे तनाव के बीच विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के संबंध में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) से पारित फैसले का भारत ने संज्ञान लिया है। हम शांति, लोकतंत्र और स्थिरता के पक्षधर हैं।’ विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ‘भारत बांग्लादेश के नागरिकों के सर्वोत्तम हितों के लिए भी प्रतिबद्ध है।
इससे पहले बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और देश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को तुरंत प्रत्यर्पित करने का आग्रह किया। पड़ोसी देश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘हम भारत सरकार से इन दोनों दोषियों को तुरंत बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपने की अपील करते हैं। बांग्लादेश और भारत के बीच मौजूदा द्विपक्षीय प्रत्यर्पण समझौता दोनों दोषियों के प्रत्यर्पण को नई दिल्ली की अनिवार्य जिम्मेदारी बनाता है। पड़ोसी देश के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि मानवता के विरुद्ध अपराध के दोषियों को शरण देना न्याय की अवहेलना के अलावा दोस्ताना रिश्ते के खिलाफ किया गया कृत्य माना जाएगा।
प्रत्यर्पण संधि के अनुसार, शेख हसीना को भारत से वापस भेजे जाने की अपील को लेकरबांग्लादेश (Bangladesh ) अंतरिम सरकार के कानूनी सलाहकार आसिफ नजरुल ने कहा, अंतरिम सरकार हसीना के प्रत्यर्पण के लिए भारत को फिर से पत्र लिखेगी। बांग्ला भाषा के अखबार प्रथम अलो (Prothom Alo) ने नजरुल के हवाले से कहा, ‘अगर भारत इस हत्यारे (mass murderer) को पनाह देना जारी रखता है, तो उसे यह समझना चाहिए कि यह शत्रुतापूर्ण कार्रवाई है…।’ उन्होंने हसीना को सुनाई गई मौत की सजा को ‘बांग्लादेश की धरती पर न्याय स्थापित करने की सबसे बड़ी घटना’ बताया। उन्होंने कहा, ‘मुझे इस फैसले पर कोई आश्चर्य नहीं है। हसीना और उनके सहयोगियों ने मानवता के विरुद्ध अपराध किए हैं। अकाट्य और पुख्ता सबूतों को देखते हुए दुनिया की किसी भी अदालत में मुकदमा चलाए जाने पर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए थी।


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