Tuesday, June 23, 2026

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सुप्रीम कोर्ट से स्वयंभू संत आसाराम बापू को राहत, पीड़िता की अर्जी खारिज, जमानत रहेगी बरकरार

स्वयंभू संत   (Asaram Bapu ) से जुड़े बहुचर्चित यौन-शोषण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मिली अंतरिम चिकित्सा जमानत को रद्द करने से इनकार कर दिया है। सोमवार को दिए गए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता की याचिका खारिज करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा दी गई राहत में हस्तक्षेप करने से साफ मना कर दिया। हालांकि अदालत ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि वर्ष 2018 से लंबित आपराधिक अपील का शीघ्र निस्तारण आवश्यक है और राजस्थान हाई कोर्ट से इसे तीन माह के भीतर निपटाने के लिए कहा है।

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने की। पीठ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में हाई कोर्ट द्वारा दी गई चिकित्सा जमानत को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता, लेकिन मामले की लंबित स्थिति निश्चित रूप से चिंता का विषय है।

शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि IPC और POCSO अधिनियम के तहत गंभीर आरोपों में दोषसिद्ध व्यक्ति को इस तरह से बार-बार अंतरिम राहत देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आसाराम बापू  (Asaram Bapu ) ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है और चिकित्सा जमानत की अवधि के दौरान सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लिया। साथ ही यह भी तर्क रखा गया कि आसाराम ऐसी ‘वनस्पतिक अवस्था’ में नहीं हैं, जैसा कि हाई कोर्ट के आदेशों में दर्शाया गया था।

आसाराम बापू  (Asaram Bapu ) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने पक्ष रखा। वहीं राजस्थान राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा और अधिवक्ता सोनाली गौर उपस्थित रहे। राज्य सरकार के अधिवक्ताओं ने शिकायतकर्ता की आपत्तियों का समर्थन करते हुए अपील की असामान्य देरी और पूर्व में ज़मानत शर्तों के उल्लंघन की ओर भी अदालत का ध्यान आकर्षित किया।

ट्रायल कोर्ट ने 15 अप्रैल 2018 को आसाराम बापू को IPC की धाराओं 370(4), 342, 506, 376-D, 376(2)(F) तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ दायर उनकी अपील उसी वर्ष राजस्थान हाई कोर्ट में दाखिल की गई थी, जो तब से लंबित है। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से कई बार शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया जा चुका है।

राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम की उम्र, जो वर्तमान में 86 वर्ष है और उनकी चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपील के अंतिम निर्णय तक उनकी सजा को निलंबित कर अंतरिम चिकित्सा जमानत दी थी। हाई कोर्ट ने यह राहत देते समय कुछ शर्तें भी तय की थीं, जिनमें भारत से बाहर न जाने, नियमित अंतराल पर चिकित्सा रिपोर्ट दाखिल करने और निर्धारित अवधि पूरी होने पर संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष आत्मसमर्पण करने जैसी शर्तें शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत को रद्द करने की मांग ठुकराते हुए कहा कि इस स्तर पर उसमें दखल उचित नहीं होगा। साथ ही अदालत ने यह भी माना कि इतने वर्षों से लंबित अपील का शीघ्र निस्तारण न्यायहित में आवश्यक है। इसी कारण राजस्थान हाई कोर्ट से आग्रह किया गया कि वह तीन माह की समय-सीमा के भीतर अपील की सुनवाई कर निर्णय सुनाए।
Vijay Upadhyay

Vijay Upadhyay is a career journalist with 23 years of experience in various English & Hindi national dailies. He has worked with UNI, DD/AIR & The Pioneer, among other national newspapers. He currently heads the United News Room, a news agency engaged in providing local news content to national newspapers and television news channels