BMC Election Results :ठाकरे ब्रदर्स का गेम ‘ओवर’: मराठी अस्मिता के नाम पर गालीबाजी और लुंगी-पुंगी करने वाले राज ठाकरे को गले लगा उद्धव ठाकरे ने हाथ जला लिए
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों 2026 के नतीजे आ गए हैं। बीजेपी ने विधानसभा चुनाव की तरह ही प्रचंड जीत हासिल की है। इस जीत के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति को नया संदेश गया है। नफरती पॉलिटिक्स हीरो रहे राज ठाकरे निकाय चुनाव में खत्म हो गए हैं। मनसे मुंबई महानगरपालिका(BMC) में तीन से चार सीटें जीतती दिख रही है। मराठी अस्मिता के नाम पर गालीबाजी और लुंगी-पुंगी करने वाले राज ठाकरे के नफरती पॉलिटिक्स को महाराष्ट्र की जनता ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनके चक्कर में उद्धव ठाकरे के हाथ भी जल गए हैं। बीएमसी की सत्ता 30 साल बात उद्धव ठाकरे के हाथों से जा रही है।
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी गठबंधन को विधानसभा चुनाव में मिली जीत कोई तुक्का नहीं थी। वह महिलाओं और युवाओं को साधने की भाजपा बहुत सोची-समझी रणनीति थी जिस पर जनता ने एक बार फिर निगम चुनाव में मुहर लगाया है। इस जीत से राज्य और भाजपा में इस जीत के नायक देवेन्द्र फडणवीस का कद और ऊंचा हो गया है।
मुंबई नगर निगम(BMC) में सत्ता खोने के बाद निगम से ठाकरे युग का अंत होता दिखाई दे रहा है। उद्धव ठाकरे को समझना पड़ेगा कि बाला साहब ठाकरे के सिद्धांतों से समझौता उनके लिए बहुत भारी पड़ा है। इस चुनाव में बाला साहब ठाकरे के रहे सहे समर्थकों ने भी उद्धव का साथ छोड़ दिया है। ठाकरे परिवार की ‘टकसाल’ कहे जाने वाले मुंबई नगर निगम से अब ठाकरे परिवार को आर्थिक संजीवनी नहीं मिलेगी। ऐसे में अब शिवसेना (उद्घव ठाकरे गुट) की राजनीति कितनी आगे बढ़ पाएगी, यह बड़ा सवाल है।
राज ठाकरे की पहचान महाराष्ट्र की राजनीति में नफरती पॉलिटिक्स को लेकर ही रही है। मराठी अस्मिता के नाम पर गैर मराठियों के साथ मारपीट और गालीगलौज उनके कार्यकर्ताओं की पहचान रही। राजे ठाकरे अपनी सभाओं में खुद भी जुबान पर कंट्रोल नहीं कर पाते थे। निकाय चुनाव में प्रचार के दौरान कहा था कि यूपी-बिहार के लोगों को समझना चाहिए कि हिंदी आपकी भाषा नहीं है। मुझे भाषा से नफरत नहीं है। लेकिन अगर आप इसे थोपेंगे तो मैं लात मारूंगा।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में भाजपा नेता के. अन्नामलाई के लिए किया गया तंज उलटा पड़ गया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने तमिलनाडु के भाजपा नेता अन्नामलाई के संदर्भ में ‘रसमलाई’ शब्द का प्रयोग किया था।बीएमसी चुनाव में अन्नामलाई ने जिन उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया था, उन्होंने शुक्रवार को अपने-अपने वार्ड में शानदार जीत दर्ज की।
बीएमसी द्वारा जारी परिणामों के अनुसार, भाजपा के तेजिंदर सिंह तिवाना और योगेश वर्मा ने मलाड पश्चिम के क्रमशः वार्ड 47 और 35 से जीत हासिल की, जबकि दक्षता कवठणकर अपने वार्ड 19 से विजयी रहीं। अन्नामलाई ने इन उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया, संबंधित वार्ड में जनसभाएं कीं और स्थानीय मतदाताओं से संवाद किया।
राज ठाकरे इस चुनाव में अपने पुराने अंदाज के जरिए खोई जमीन को वापस पाना चाहते थे। वह मराठी अस्मिता के नाम पर नफरती पॉलिटिक्स कर रहे थे। उत्तर से लेकर दक्षिण भारतीयों तक के खिलाफ मराठियों को भड़का रहे थे। लेकिन महाराष्ट्र की जनता ने विधानसभा चुनाव की तरह ही उन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भाई उद्धव ठाकरे से हाथ मिलाने के बाद भी राज को कामयाबी नहीं मिली है। बल्कि उद्धव को नुकसान यह हुआ कि उनसे उत्तर भारतीय वोटर कट गए।
वहीं, ठाकरे बंधुओं की पूरी राजनीति मराठी वोटरों के इर्द गिर्द थी। लेकिन मराठी वोटरों ने ही मुंह मोड़ लिया। बीजेपी की रणनीति ठाकरे बंधुओं पर भारी पड़ी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडण्वीस ने चुनाव के दौरान कहा था कि मैं भी मराठी हूं। मैं कोई बाहर से नहीं आया हूं। महाराष्ट्र के लोगों के लिए मैं भी लड़ता हूं। नागपुर भी महाराष्ट्र में ही है।
मुंबई में मराठी वोटरों की संख्या महज 38 फीसदी है। इसके बाद वहां की अबादी, उत्तर भारतीय, गुजराती और अन्य लोगों की है। राज की नफरती राजनीति के कारण दूसरे वोटर्स इनके साथ नहीं जुड़ पाए। इसका नुकसान यह हुआ कि राज ठाकरे की पॉलिटिक्स पर अब ग्रहण लग गया है।
राज ठाकरे 2005 में मातोश्री छोड़कर गए थे। 2006 में अपनी पार्टी बनाई थी। उनकी पार्टी को शिवसेना का उत्तराधिकारी माना जाता था। निकाय चुनाव से पहले राज ठाकरे ने अपने भाई उद्धव से हाथ मिलाया था।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा और महायुति ने बीएमसी चुनाव में शानदार सफलता हासिल की है। महाराष्ट्र की जनता को धन्यवाद देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि महाराष्ट्र की धरती भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक रही है। मुम्बई में इस जीत के लिए उन्होंने युवाओं का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मुंबई की जेन जी ने विकसित भारत के लिए वोट किया है। इसके पहले केरल के निगम चुनाव में भी भाजपा को सफलता मिली थी।
राज्यसभा सांसद त्रिवेदी ने कहा कि जाकिर नाईक और अफजल गुरु के साथ खड़े होने के कारण विपक्ष लगातार हार का सामना कर रहा है लेकिन इसके बाद भी वह अपनी गलती को समझना नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि बाला साहब ठाकरे की सैद्धांतिक राजनीति से भटकने के कारण उद्धव ठाकरे को इस करारी हार का सामना करना पड़ रहा है। बाला साहब ठाकरे की सोच से उल्ट आज उद्धव ठाकरे पाकिस्तान, बाबरी मस्जिद का निर्माण करने वालों के साथ खड़े दिख रहे हैं। यही कारण है कि उन्हें लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है।