Tuesday, June 23, 2026

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Uttar Pradesh :’सब ठाकुर हैं, सब उनके ही आदमी हैं…’, बदायूं में हिंदुस्तान पेट्रोलियम के ऑफिस के अंदर मारे गए अफसर हर्षित मिश्रा की मां चीख-चीख कर बोलीं

cried the mother of Harshit Mishra, the officer killed inside the HPCL office in Badaun.

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के   () जिले में आरोपी और एचपीसीएल( HPCL ) अधिकारियों के बीच पिछले छह महीने से दुश्मनी ठनी हुई थी। अधिकारियों पर जानलेवा होने के बाद पांच फरवरी को आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने आरोपी पर शांतिभंग तक की कार्रवाई नहीं की। यही वजह रही कि आरोपी के हौसले इतने बढ़ गए कि उसने दिनदहाड़े दोनों अधिकारियों की प्लांट के अंदर घुसकर हत्या कर दी।

कल भी बेटे से बात हुई थी। उसने बताया था कि उसकी जान को खतरा है। इस बारे में उसने एसपी को भी बताया, डीएम के पास भी गया। विधायक के पास भी शिकायत की थी। लेकिन जब भी वे विधायक के पास जाते थे, तो वह कभी इनकी तरफ बोलते थे तो कभी अजय सिंह की तरफ होते थे। सब ठाकुर हैं, सब उनके भाई जैसे हैं। सभी ने मिलकर बेटे को मारा है।

ये कहना है रीना मिश्रा का, जिनके बेटे असिस्टेंट मैनेजर हर्षित मिश्रा की HPCL प्लांट में गोली मारकर हत्या कर दी गई। पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर पिता ने कहा- इस मामले में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ( Hindustan Petroleum Corporation Limited) के CGM राजीव सिंह की भूमिका है। अजय प्रताप सिर्फ एक छोटा मोहरा है।

गुरुवार दोपहर 1 बजे अजय प्रताप सिंह ने DGM सुधीर गुप्ता (55) और असिस्टेंट मैनेजर हर्षित मिश्रा (35) की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने शुक्रवार सुबह हाफ एनकाउंटर करके आरोपी अजय को पकड़ा। पूछताछ में खुलासा हुआ कि अजय ने पहली गोली हर्षित मिश्रा को मारी थी। डीजीएम सुधीर गुप्ता भागने लगे तो उन्हें ग्राउंड में दौड़ाकर दो गोलियां मारीं।

हर्षित की मां रानी मिश्रा ने कहा- सभी लोग होटल रेडिसन में रुके हुए थे और परसों से ही झगड़ा चल रहा था। अजय का साथी केशव भी आकर धमकाता था। कहता था कि उसका आतंकवादी लोगों से संबंध है।

परसों राजीव सर, अनूप सर और किरण कोठारी तीनों यहां आए थे, लेकिन घटना के बाद चले गए। किसी को खरोंच तक नहीं आई। आखिर मेरे बच्चे को ही क्यों मार दिया गया?

प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था भी थी। सवाल यह है कि जब इतनी सुरक्षा थी, तो बंदूक अंदर कैसे पहुंच गई? वहां सीसीटीवी भी होगी, उसकी फुटेज सामने लाई जाए। एचपीसीएल के अधिकारी यह क्यों नहीं बता रहे कि आखिर वहां हुआ क्या था?

अब हम क्या चाहते हैं? अगर उसे फांसी भी हो जाए तो क्या हमारा बच्चा वापस आ जाएगा? हम तो बस यही कहते हैं कि जैसे हमारे बेटे को बेरहमी से मारा गया, वैसे ही आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और हमें न्याय मिले।

एचपीसीएल( HPCL ) प्लांट की सुरक्षा की जिम्मेदारी में 12 गार्ड्स तैनात हैं। इनका काम हर भीतर जाने वाले व्यक्ति का रजिस्ट्रर मेंटेन करना और उसकी तलाशी लेना है। हालांकि जब पुलिस ने उस वक्त ड्यूटी पर मौजूद गार्ड्स का बयान दर्ज किया तो सभी ने कहा कि वो स्टाफ की गाड़ी में छिपकर आया था और हम उसे नहीं देख सके। हालांकि तलाशी क्यों नहीं ली गई, इस सवाल का जवाब किसी गार्ड के पास नहीं है।

दरअसल, आरोपी जब थाने में सरेंडर करने पहुंचा तो उसने दोहरे हत्याकांड का गुनाह कबूलते हुए पुलिस को एक तमंचा भी सौंपा। उसने पुलिस से कहा कि इसी से वारदात की है। उस समय पुलिस ने उसे कस्टडी में ले लिया।

जब उस तमंचे की जांच हुई तो उसमें से गन पाउडर की गंध नहीं मिली। उससे फायर नहीं हुआ था। ऐसे में दोबारा पूछताछ में उसने कबूला कि तमंचा जंगल में फेंका है। पुलिस उसे लेने गई तो वहां लोडेड तमंचा मिला था।

अजय प्रताप सिंह की प्लांट के अफसरों से अच्छी जान पहचान थी। इसलिए वह लोगों की नौकरी आसानी से प्लांट के अंदर आउटसोर्स के जरिए लगवा देता था। इसके बदले वो रुपए लेता था।

एचपीसीएल( HPCL ) पराली के ठेके भी उठाता था। रुपए लेकर नौकरी दिलाने की बात जब डीजीएम को पता चली तो उन्होंने तीन महीने पहले उसे नौकरी से निकाल दिया। पराली के ठेके देने बंद कर दिए। इससे वह नाराज हो गया और धमकाने लगा। जब अफसर नहीं मानें तो दोनों की हत्या कर दी।

Vijay Upadhyay

Vijay Upadhyay is a career journalist with 23 years of experience in various English & Hindi national dailies. He has worked with UNI, DD/AIR & The Pioneer, among other national newspapers. He currently heads the United News Room, a news agency engaged in providing local news content to national newspapers and television news channels