Tuesday, June 23, 2026

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‘अगर माता-पिता दोनों आईएएस हैं, तो फिर बच्चों को कोटा क्यों चाहिए?’ आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

 (  )  ने यह देखते हुए कि शैक्षणिक और आर्थिक रूप सशक्तिकरण के साथ साथ सामाजिक गतिशीलता भी आती है, कोर्ट ने शुक्रवार को पिछड़े वर्गों के उन्नत परिवारों के बच्चों को लगातार आरक्षण का लाभ देने पर सवाल उठाया।

कोर्ट ( Supreme Court ) ने टिप्पणी की कि अगर माता पिता दोनों आईएएस हैं तो उन्हें आरक्षण क्यों मिलना चाहिए? शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तीकरण के साथ साथ सामाजिक गतिशीलता भी आती है। ये टिप्पणियां न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और उज्जवल भुइयां की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं।

याचिका में कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आरक्षण से बाहर रखने के फैसले को सही ठहराया था। याचिकाकर्ता के माता पिता दोनों ही राज्य सरकार के कर्मचारी हैं।

मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर छात्रों के माता पिता अच्छी नौकरियों में हैं और उनकी आय भी अच्छी खासी है, तो बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाना चाहिए।

कोर्ट ( Supreme Court ) ने कहा कि सरकार द्वारा जारी कई आदेशों में पहले से ही ऐसे समृद्ध वर्गों को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने का प्रविधान है। लेकिन अब उन आदेशों को चुनौती दी जा रही है।

पीठ ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के मामले में , सामाजिक पिछड़ापन नहीं बल्कि केवल आर्थिक पिछड़ापन होता है। इसमें कुछ संतुलन होना चाहिए।

सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए, यह बात सही है लेकिन जब माता पिता आरक्षण का लाभ उठाकर एक निश्चित स्तर तक पहुंच चुके हैं, तो फिर उनके बच्चों को आरक्षण क्यों मिलना चाहिए।

याचिकाकर्ता को कर्नाटक पावर ट्रांसमीशन कारपोरेशन लिमिटेड में आरक्षित श्रेणई के तहत असिस्टेंट इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) के पद पर नियुक्ति के लिए चुना गया था।

हालांकि जिला जाति और आय सत्यापन समिति ने ये निष्कर्ष निकालते हुए कि वह क्रीमी लेयर (सम्पन्न वर्ग) के अंतरगत आता है, उसे जाति वैधता प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया।

अधिकारियों ने पाया कि याचिकाकर्ता के माता पिता दोनों ही सरकारी कर्मचारी थे और उनकी संयुक्त आय निर्धारित क्रीमी लेयर सीमा से अधिक थी। याचिकाकर्ता को क्रीमी लेयर मे वर्गीक्रत करने का आधार उसके माता पिता की आय थी।

वे दोनों ही वेतनभोगी कर्मचारी थे और कथित तौर पर उनकी संयुक्त आय 800000 (आठ लाख) रुपये से अधिक थी। परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता को जारी किया गया जाति प्रमाणपत्र रद कर दिया गया, जिसमें उसे कुरुबा समुदाय का सदस्य प्रमाणित किया गया था।

Vijay Upadhyay

Vijay Upadhyay is a career journalist with 23 years of experience in various English & Hindi national dailies. He has worked with UNI, DD/AIR & The Pioneer, among other national newspapers. He currently heads the United News Room, a news agency engaged in providing local news content to national newspapers and television news channels