कांग्रेस ( Congress ) में अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ रही है। बिहार विधानसभा चुनावों के बाद से ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुलकर कांग्रेस लीडरशिप पर आवाज उठा रहे हैं।
कांग्रेस ( Congress ) के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ( Ghulam Nabi Azad )ने एक बार फिर पार्टी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने रविवार को पार्टी में पदाधिकारियों के चुनाव कराने पर जोर देते हुए नेताओं में पनप रहे 5 स्टार कल्चर और चुनाव में मिली हार पर भी तीखे कमेंट किए।
राज्यसभा ( RajyaSabha )में विपक्ष के नेता आजाद ( Ghulam Nabi Azad )ने चुनावों में मिली हार पर कहा कि हम सभी पार्टी को हो रहे नुकसान को लेकर फिक्रमंद हैं। खासकर बिहार और देश के कई राज्यों में हुए उपचुनावों के नतीजों से। मैं इस नुकसान के लिए पार्टी की लीडरशिप को दोष नहीं देता। हमारे लोगों ने जमीन से जुड़ाव खत्म कर लिया है। किसी को भी अपनी पार्टी से प्यार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 5 स्टार कल्चर से चुनाव नहीं जीते जा सकते। आज नेताओं के साथ यह दिक्कत है कि अगर उन्हें टिकट मिल जाता है तो वे सबसे पहले 5 स्टार होटल बुक करते हैं। अगर सड़क खराब है तो वे उस पर नहीं जाएंगे। जब तक इस 5-स्टार कल्चर को छोड़ नहीं दिया जाता, तब तक कोई चुनाव नहीं जीता जा सकता।
आजाद ( Ghulam Nabi Azad )ने कहा कि हमारी पार्टी का ढांचा ढह गया है। हमें इसे फिर से तैयार करने की जरूरत है। फिर कोई नेता उस स्ट्रक्चर के हिसाब से चुना जाता है, तो यह तरीका काम करेगा, लेकिन यह कहना कि सिर्फ नेता बदलने से हम बिहार या यूपी, एमपी जीत लेंगे तो यह गलत है। एक बार जब हम सिस्टम बदल देंगे तो ऐसा होने लगेगा।
चाटुकारिता की संस्कृति से कोई भी पार्टी ज्यादा दिन नहीं चल सकती और साथ ही साथ यह नेताओं के पतन का मुख्य कारण भी बन गई है। हमें हर स्तर पर इस संस्कृति से दूर रहना चाहिए। राजनीति एक तपस्या है। उन लोगों पर शर्म आती है जो आनंद और धन के लिए राजनीति में शामिल होते हैं।
पिछले 72 साल में कांग्रेस सबसे निचले पायदान पर है। कांग्रेस के पास पिछले दो कार्यकाल के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद भी नहीं है। हालांकि, कांग्रेस ने लद्दाख हिल काउंसिल के चुनावों में 9 सीटें जीतीं। हम वहां इस तरह के पॉजिटिव रिजल्ट की उम्मीद नहीं कर रहे थे।
वहीं आजाद ( Ghulam Nabi Azad )ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण पार्टी नेतृत्व को क्लीन चिट दे रहा हूं क्योंकि वे अभी बहुत कुछ नहीं कर सकते। हम मांगों पर अभी भी अडिग हैं। हालेंकि वे हमारी अधिकांश मांगों के लिए सहमत हो गए हैं। यदि वे राष्ट्रीय विकल्प बनना चाहते हैं और पार्टी को पुनर्जीवित करना चाहते हैं तो हमारे नेतृत्व को चुनाव करना चाहिए।


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