उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh) के उन्नाव ( Unnao ) जिले में एबीनगर स्थित स्कूल में 10वीं कक्षा की छात्रा स्मृति अवस्थी ( student Smriti Awasthi )ने स्कूल की मनमानी से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। स्कूल पर आरोप है कि आधी फीस जमा होने पर भी उसे कक्षा और परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया गया। प्रधानाचार्य ने उसे स्कूल तक से भगा दिया, जिससे आहत होकर स्मृति ने विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली।। आगरा( AGRA) में इसके विरोध में प्रदर्शन हुआ है।प्रोग्रेसिव आगरा पेरेंट्स एसोसिएशन (पापा) ने स्मृति अवस्थी की याद में संजय प्लेस स्थित शहीद स्मारक पर शोक सभा की।
आगरा में स्कूलों द्वारा जबरन फीस वसूली को लेकर जबरदस्त गुस्सा है, स्कूल मनमानी कर रहे है ।कोरोना काल में आर्थिक तंगी से जूझ रहे अभिवावक और उनके अध्ययनरत् बच्चों को फीस वसूली के लिये मानसिक रुप से प्रताड़ित किया जा रहा ,है जिसके कारण छात्रा स्मृति अवस्थी ( student Smriti Awasthi )जैसे बच्चे आत्मघाती कदम उठा रहे है।
संस्था के राष्ट्रीय संयोजक दीपक सिंह सरीन ने बताया कि स्मृति ( student Smriti Awasthi )की मां और पिता सुशील अवस्थी इस सदमे से उबर नहीं पा रहे। चाचा राजाराम अवस्थी ने उन्हें बताया कि स्कूल प्रबंधक रसूखदार है, इसलिए उन्हें आशंका है कि न्याय मिलना मुश्किल होगा। लिहाजा संस्था सदस्य जल्द ही उन्नाव जाकर इस मामले में जिलाधिकारी और शिक्षा विभाग से संपर्क कर स्कूल प्रधानाचार्य पर कार्रवाई और स्कूल की मान्यता रद्द करने संबंधित कार्रवाई की मांग करेंगे। शोक सभा में सैकड़ों अभिभावकों ने मोमबत्ती जलाकर स्मृति को श्रद्धांजलि दी। विवेक रायजादा, सुमित सक्सेना, एमएस पवार, डा. वेदांत, मोहित अग्रवाल, राकेश चावला, अभय मेहरा, गौरव अरोड़ा आदि मौजूद रहे।
मालूम हो कि उन्नाव ( Unnao ) जिले में आदर्श नगर निवासी सुशील कुमार अवस्थी की इकलौती बेटी स्मृति ( student Smriti Awasthi )सरस्वती विद्या मंदिर एबीनगर में कक्षा दस की छात्रा थी। उसकी तीन माह की फीस नहीं जमा कर सका। बेटी फीस माफी का प्रार्थना पत्र देने के लिए स्कूल गई थी। आरोप है कि प्रार्थना पत्र न लेकर भगा दिया। प्रधानाचार्य ने त्रैमासिक परीक्षा में बैठने से मना कर दिया।
17 वर्ष पहले सुशील पत्नी के साथ पैतृक गांव माखी के भदियार गांव से शहर आ गया। पहले शुक्लागंज में किराये का कमरा लेकर रहा। फिर शहर के आदर्श नगर में 1600 रुपये में किराये का कमरा लेकर पत्नी व बेटी के साथ रहने लगा। पहले शराब मिल में नौकरी की। मौजूदा समय में हिरन नगर स्थित तंबाकू फैक्टरी में छह हजार रुपये में नौकरी करने लगा। स्मृति को पढ़ा लिखाकर अफसर बनाने का सपना लेकर सुशील बेटी को अच्छी शिक्षा भी दिलाने लगा। पढ़ाई में तेज होने और 10वीं कक्षा में स्मृति के पहुंचने पर पिता सुशील के सपनों को पंख लगने शुरू हो गए थे।


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