थाईलैंड और कंबोडिया (Thailand and Cambodia )के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर सतह पर आ गया है और इसका केंद्रबिंदु बना है प्रीह विहिअर ‘शिव मंदिर ( Shiv Temple )। एक प्राचीन हिंदू तीर्थ जो कभी खमेर साम्राज्य के वैदिक वैभव का प्रतीक था।शिव मंदिर को लेकर दो एशियाई देश आपस में भिड़ गए हैं।
1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने प्रेह विहेयर मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा माना था, लेकिन यह फैसला आज तक थाईलैंड को रास नहीं आया। 2011 में हुए झड़पों में करीब 20 लोग मारे गए थे और हजारों विस्थापित हुए थे। 2013 में अदालत ने एक बार फिर कंबोडिया के पक्ष में फैसला दिया, जिससे थाईलैंड में असंतोष बढ़ा। अब एक बार फिर वही पुराने जख्म हरे हो गए हैं।
कंबोडियाई सेना प्रीह विहिअर मंदिर के पास निगरानी चौकियों को उन्नत कर रही है तो थाई सैनिक क्षेत्र में गश्त तेज कर रहे हैं। थाईलैंड का आरोप है कि कंबोडिया सैन्य निर्माण कर रहा है, वहीं कंबोडिया ने कहा कि वह अपने संप्रभु क्षेत्र की सुरक्षा कर रहा है।
थाईलैंड और कंबोडिया(Thailand and Cambodia ) में सीमा पर झड़प जारी है। साथ ही युद्धविराम के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच दोनों देश एक-दूसरे पर हमले शुरू करने का आरोप लगा रहे हैं। अब तक इस लड़ाई में कम से कम 33 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 1,68,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। शनिवार दोपहर को आसमान में जोरदार विस्फोट हुए और प्रतिद्वंद्वी देशों के तटीय क्षेत्रों में पहली बार झड़पें हुईं।
कंबोडिया के सूचना मंत्री नेथ फेकट्रा ने शनिवार को कहा कि झड़पों के कारण तीन सीमावर्ती प्रांतों में 10,865 परिवारों यानी करीब 37,635 लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। वहीं, थाई अधिकारियों ने कहा कि 131,000 से ज्यादा लोग सीमावर्ती गांव से भाग चुके हैं।
कंबोडिया के मैदान पर स्थित एक पठार के किनारे स्थित, प्रीह विहार मंदिर शिव को समर्पित है। यह मंदिर 800 मीटर लंबी धुरी पर फुटपाथों और सीढ़ियों की एक प्रणाली द्वारा जुड़े हुए कई अभयारण्यों से बना है और इसका निर्माण 11वीं शताब्दी ईस्वी के पूर्वार्ध में हुआ था। प्रीह विहिअर मंदिर को खमेर शासकों ने भगवान शिव को समर्पित कर बनवाया था।अभयारण्यों की एक श्रृंखला का एक अद्वितीय वास्तुशिल्प परिसर है, जो योजना, सजावट और शानदार परिदृश्य पर्यावरण के संबंध के संदर्भ में खमेर वास्तुकला का एक उत्कृष्ट कृति है।
मंदिर वैदिक और शैव परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। 1954 में जब फ्रांस ने कंबोडिया को स्वतंत्र किया तब यह मंदिर विवाद में आ गया, क्योंकि यह थाईलैंड सीमा से सटा हुआ है और दोनों देश इस पर दावा करने लगे। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा घोषित किया, लेकिन उसके चारों ओर की भूमि पर थाईलैंड (Thailand )ने अब तक अधिकार जताया हुआ है।


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