गुजरात ( Gujarat) में ऑनर किलिंग की खौफनाक घटना सामने आई है। बनासकांठा ( Banaskantha )जिले में गुजरात हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले में सुनवाई से पहले लिव इन में रहने वाली युवती को उसके पिता ने भाई के साथ मिलकर मार डाला। इतना ही नहीं दोनों आरोपी भाइयों ने सबूत मिटाने के लिए बेटी की हत्या के बाद रातोंरात उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। लड़की के प्रेमी ने इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
बनासकांठा ( Banaskantha )जिले के थराद पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार दांतिया गांव के सेंधाभाई दरघाभाई चौधरी की बेटी चंद्रिका, पालनपुर के एक छात्रावास में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान चंद्रिका थराद तालुका के वडगामड़ा निवासी हरेश चौधरी नामक युवक के संपर्क में आई। दोस्ती के बाद दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए और दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था। इसी बीच 04 मई 2025 को चंद्रिका परिवार में एक शादी के चलते पालनपुर से थराद के दांतिया आई हुई थी। शादी के बाद चंद्रिका ने उसे फिर से पालनपुर जाने के लिए कहा लेकिन परिवार ने आगे पढ़ाई से साफ इनकार कर दिया।
चंद्रिका ने सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रेमी हरेश को बताया और कहा कि मेरे घरवाले मुझे पढ़ाई से मना कर रहे हैं। अगर मेरे परिवार को हमारे प्रेम संबंध के बारे में पता चला, तो वे मेरी शादी करवा देंगे और मेरा मोबाइल भी जब्त कर लेंगे, इसलिए तुम मुझे यहां से ले जाओ। इसके बाद जब हरेश अपनी प्रेमिका चंद्रिका को अहमदाबाद ले गया और वहां दोनों ने खुशी-खुशी दोस्ती (लिव इन) का समझौता किया। इसके बाद दोनों घूमने के लिए मध्य प्रदेश और बाद में राजस्थान गए। इधर, चंद्रिका के परिवार ने थराद थाने में बेटी की गुमशुदगी का केस दर्ज करा दिया।
12 जून को थराद पुलिसकर्मियों और लड़की के एक रिश्तेदार ने उन्हें राजस्थान के एक होटल में ढूंढ निकाला। लड़की को उसके चाचा शिवरामभाई को सौंप दिया गया। जबकि लड़के चौधरी को कच्छ जिले के भचाऊ में दर्ज एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। 21 जून को जेल से बाहर आने के बाद चौधरी को पता चला कि मृतका ने 17 जून को इंस्टाग्राम पर उसे दो बार संदेश भेजा था, जिसमें उसने अपने रिश्तेदारों द्वारा मारे जाने या किसी और से शादी कर दिए जाने का डर जताया था।
चौधरी ने पुलिस को बताया कि जब संदेश भेजे गए तो वह उन्हें पढ़ नहीं पाए, क्योंकि उस समय वह जेल में थे। इसके बाद उसने अपने वकील से संपर्क किया और गुजरात उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर मांग की कि लड़की को अदालत में पेश किया जाए। याचिका पर सुनवाई से ठीक दो दिन पहले 25 जून को हरेश चौधरी को पता चला कि 24 जून की रात को लड़की मौत हो गई थी और अगली सुबह उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था।
युवक की शिकायत पर बनासकांठा ( Banaskantha )के पुलिस अधीक्षक अक्षयराज मकवाना ने किशोरी की मौत की जांच के आदेश दिए थे। एफआईआर में कहा गया कि पुलिस को जांच में पता चला कि लड़की के पिता और चाचा ने उसे इस डर से मारने का फैसला किया था कि वह एक बार फिर शिकायतकर्ता के साथ भाग सकती है।


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