मध्यप्रदेश ( Madhya Pradesh ) की भाजपा सरकार ने अपने ही पार्टी के विधायक संजय पाठक( Sanjay Pathak )पर अवैध उत्खनन के मामले में 443 करोड़ रुपये का भारी भरकम जुर्माना लगाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेसी विधायकों के सवालों का जवाब देते हुए ये जानकारी लिखित में दी। मामला कटनी के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी खदानों का है। आरोप है कि विधायक संजय पाठक की जबलपुर के सिहोरा में निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग और पेसिफिक एक्सपोर्ट के नाम से तीन खदानें है। इन सभी खदानों में जमकर अवैध उत्खनन हुआ है।
दरअसल, शिकायतकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित ने मार्च 2025 में ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि संजय पाठक ( Sanjay Pathak )से जुड़ी तीनों कंपनियों द्वारा स्वीकृति से अधिक मात्रा में उत्खनन किया गया है। इस शिकायत के बाद 23 अप्रैल को एक जांच टीम बनाई गई। जांच टीम ने 6 जून को रिपोर्ट शासन को सौंपी। इसमें तीनों कंपनियों पर 443 करोड़ की वसूली निकाली गई।
विधायक संजय पाठक की कंपनी के अधिकारियों की तरफ से एक पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि उनकी कंपनी 70 वर्षों से खनन कारोबार में है। कंपनियों द्वारा कोई अवैध उत्खनन नहीं किया गया। जांच दल के अधिकारियों ने बिना मौके पर जाए गलत रिपोर्ट तैयार की है।
विधायक संजय पाठक ( Sanjay Pathak ) ने एक मीडिया ग्रुप से बातचीत में कहा है कि हमारे परिवार का व्यापार का 125 वर्ष पुराना इतिहास रहा है। और 1910 से लगभग 115 साल से हम लोग माइनिंग में हैं। और वर्ल्ड मिनरल बुक में सीएल पाठक एंड संस हमारी फर्म का नाम है।
ये जिस माइंस की बात कर रहे हैं। इस माइंस को हम लोग खुद 70-75 साल से चला रहे हैं। और इन्होंने कहा कि चार-पांच सौ एकड़ में फैली खदान को सिर्फ दो महीनों में नाप दिया। ये संभव नहीं हैं।
हमने मुख्यमंत्री जी से अनुरोध किया है और पीएस माइनिंग को भी लिखकर कंपनी ने दिया है कि एक पक्षीय कार्रवाई न हो। हमारी कंपनियों के पक्ष को भी सुना जाए। मुझे विश्वास है कि जब रिकॉर्ड देखेंगे तो दूध का दूध पानी का पानी निकलेगा।
कटनी के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक एक बड़े माइनिंग कारोबारी हैं। वे 2013 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। इनके पिता स्वर्गीय सत्येंद्र पाठक बड़े कांग्रेसी नेता थे और दिग्विजय सरकार में खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री भी थे। 2013 के पहले संजय पाठक भी कांग्रेस के विधायक थे, लेकिन कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने कांग्रेस विधायक रहते हुए पार्टी से इस्तीफा दिया और भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद संजय पाठक ने दोबारा चुनाव लड़ा और भाजपा से विधायक बने। इस दौरान ये भी चर्चा थी कि अपने माइनिंग कारोबार को बचाने संजय पाठक ने भाजपा का दामन थामा है।
भाजपा विधायक संजय पाठक ( Sanjay Pathak )की एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें वो ये कहते हुए साफ तौर पर नजर आ रहे हैं कि पिछले दो साल से वो परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इसके पहले पंद्रह महीने की कांग्रेस सरकार में भी उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। विधायक के इस बयान के भी कई मायने निकालें जा रहे हैं।


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