वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ( Nirmala Sitharaman) की ओर सोमवार को पेश किए गए दो अहम टैक्स बिल(Income Tax Bill ) सोमवार को ही बिना किसी बहस के पारित हो गए। लोकसभा ने सोमवार को कराधान से संबंधित दो विधेयकों- आयकर (संख्या 2) विधेयक और कराधान कानून (संशोधन) विधेयक- को विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच पारित कर दिया।
आयकर (संख्या 2) विधेयक 2025, आयकर अधिनियम 1961 से संबंधित कानूनों को समेकित और संशोधित करने के लिए पास किया गया है। वहीं, कराधान कानून (संशोधन) विधेयक 2025, आयकर अधिनियम 1961 के साथ-साथ वित्त अधिनियम 2025 में संशोधन करेगा।
63 साल पुराने आयकर कानून को बदलने के लिए लाया गया नया आयकर विधेयक (संख्या 2) 2025 सोमवार को लोकसभा में बिना किसी बहस के केवल तीन मिनट में पारित हो गया। यह बिल एक व्यक्तियों और कंपनियों के लिए आयकर कानून(Income Tax Bill ) में बदलाव से जुड़ा प्रमुख विधायी कदम है।
नए आयकर विधेयक में टीडीएस, छूट और अन्य जटिल अनुपालनों को सुव्यवस्थित करने की बात कही गई है। यह बिल देरी से दाखिल किए गए आयकर रिटर्न के मामलों में भी बिना किसी दंड के रिफंड का दावा करने की अनुमति देता है। नया संशोधित आयकर बिल लोकसभा में ऐसे समय में पारित किया गया जब विपक्षी दल बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में बरती जा रही अनियमितताओं के आरोपों के विरोध में हंगामा कर रहे थे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नया आयकर विधेयक(Income Tax Bill ) फरवरी 2025 में लोकसभा में पेश किया था। उसके बाद इस बिल को प्रवर समिति को भेज दिया गया था। प्रवर समिति की सिफारिशों के बाद 8 अगस्त को सरकार ने आयकर विधेयक वापस ले लिया और सोमवार को एक संशोधित विधेयक सदन में पेश किया। इस विधेयक में संसदीय समिति की सिफारिशों को शामिल किया गया था। इस बिल पर विपक्ष के हंगामे के बीच मतदान हुआ और यह ध्वनिमत से पारित हो गया।
अब यह विधेयक राज्यसभा में अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा और उसके बाद यह राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही नया आयकर बिल कानून बन जाएगा। सरकार के अनुसार, नया आयकर विधेयक वर्तमान आयकर अधिनियम के आकार को घटाकर इसकी जटिलता कम करता है। इस बिल में प्रभावी धाराओं और अध्यायों की संख्या में भारी कटौती की गई है, इससे इसकी शब्द संख्या लगभग आधी रह गई है।
आयकर (संख्या 2) विधेयक (Income Tax Bill ) के उद्देश्यों व इसे लाने के कारणों के बारे बारे में बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “प्रवर समिति की लगभग सभी सिफारिशें सरकार द्वारा स्वीकार कर ली गई हैं। इसके अतिरिक्त, हितधारकों से ऐसे परिवर्तनों के बारे में सुझाव प्राप्त हुए हैं जो प्रस्तावित कानून को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करेंगे।”
कर विशेषज्ञों का मानना है कि 1 अप्रैल, 2026 से, जब नया आयकर कानून लागू होगा, आयकर अधिकारियों को कर चोरी का संदेह होने पर लोगों के डिजिटल खातों, जैसे ईमेल, सोशल मीडिया, बैंक खाते, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन निवेश तक पहुंच का अधिकार मिल सकता है।