Tuesday, June 23, 2026

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Kerala: केरल के राज्यपाल ने कुलपति नियुक्तियों में मुख्यमंत्री की भूमिका के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

Kerala Governor moves Supreme Court against Kerala Chief Minister’s role in Kerala VC appointments

  )  के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने याचिका दाखिल कर मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और केरल डिजिटल विश्वविद्यालय के कुलपतियों की चयन प्रक्रिया से बाहर रखने की मांग की। राज्यपाल ने कहा कि दोनों ही विश्वविद्यालयों की चयन प्रक्रिया में मुख्यमंत्री की कोई भूमिका नहीं है। राज्यपाल इन दोनों सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं।

याचिका में दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति की पूरी चयन प्रक्रिया में मुख्यमंत्री की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। साथ ही ‘पश्चिम बंगाल राज्य बनाम डॉ. सनत कुमार घोष एवं अन्य’ मामले का हवाला दिया गया, जिसके निर्देश वर्तमान मामले में लागू किए गए थे। याचिका में कहा गया है कि कलकत्ता विश्वविद्यालय अधिनियम, 1979 की धारा 8 (1) में प्रावधान है कि चयन प्रक्रिया में राज्य के मंत्री की भूमिका होगी।
केरल( Kerala )  के राज्यपाल ने कहा, चूंकि मंत्री पश्चिम बंगाल राज्य में कुलपतियों की नियुक्ति की चयन प्रक्रिया का हिस्सा हैं, इसलिए न्यायालय ने मुख्यमंत्री को भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया है। हालांकि, न्यायालय ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय अधिनियमों- एपी जे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अधिनियम और केरल डिजिटल विश्वविद्यालय अधिनियम में कुलपतियों की नियुक्ति के लिए अनुशंसा हेतु चयन प्रक्रिया में उच्च शिक्षा मंत्री या राज्य सरकार को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है।
18 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया को दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के चयन के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। साथ ही कहा कि उनके चयन में मुख्यमंत्री की भूमिका है। हालांकि, याचिका में तर्क दिया गया कि मुख्यमंत्री की भागीदारी ‘किसी व्यक्ति द्वारा स्वयं अपने मामले का निर्णय लेने’ के सिद्धांत का उल्लंघन करेगी, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) विनियमों में निहित एक मानदंड है।
आवेदन में कहा गया है, ‘मुख्यमंत्री राज्य के कार्यकारी प्रमुख होने के नाते, सरकार द्वारा प्रबंधित और विश्वविद्यालय से संबद्ध कई सरकारी कॉलेजों से जुड़े हैं। इसलिए, यूजीसी विनियमों के अनुसार, कुलपतियों की नियुक्ति में उनकी कोई भूमिका नहीं हो सकती।’ राज्यपाल ने कहा कि वह कुलपति नियुक्तियों को अंतिम रूप देने के लिए गठित खोज-सह-चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की नियुक्ति के संबंध में 18 अगस्त के आदेश में संशोधन की मांग नहीं कर रहे हैं। न्यायाधीश द्वारा समिति का नेतृत्व करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, याचिका में कहा गया कि राज्यपाल राज्य सरकार द्वारा सुझाए गए नामितों की भागीदारी के विरोध में थे।
केरल( Kerala )  के राज्यपाल ने 18 अगस्त के आदेश में संशोधन की मांग की। साथ ही सुझाव दिया कि चयन समिति में यूजीसी चेयरमैन के एक नामित प्रतिनिधि को शामिल किया जाए और समिति द्वारा चुने गए उम्मीदवारों की सूची वर्णानुक्रम में कुलाधिपति को भेजी जाए, ताकि अंतिम चयन का अधिकार कुलाधिपति के पास रहे। इस पर अदालत ने कहा, ‘न्यायालय यूजीसी के अध्यक्ष द्वारा नामित व्यक्ति को कुलपति के चयन के लिए गठित खोज-सह-चयन समिति में सदस्य के रूप में शामिल करने का निर्देश दे सकता है, जिसका गठन न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने किया है।’

इससे पहले, केरल हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने उन अपीलों को खारिज कर दिया था, जिनमें एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी गई थी। उस फैसले में एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और केरल डिजिटल विश्वविद्यालय के अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति को अवैध करार दिया गया था।

Vijay Upadhyay

Vijay Upadhyay is a career journalist with 23 years of experience in various English & Hindi national dailies. He has worked with UNI, DD/AIR & The Pioneer, among other national newspapers. He currently heads the United News Room, a news agency engaged in providing local news content to national newspapers and television news channels