सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने मंगलवार (13 जनवरी) को आवारा कुत्तों के मामले ( Stray Dogs Case) पर अहम सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट में रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों के आतंक पर संकेत दिया कि वह आवारा कुत्तों के हमलों से होने वाली किसी भी चोट या मौत के लिए नागरिक अधिकारियों और कुत्ते पालने वालों दोनों को उत्तरदायी ठहरा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने 9 साल के बच्चे की मौत का जिक्र करते हुए बेंच पूछा कि जब 9 साल के बच्चे को आवारा कुत्ते मार देते हैं, जिन्हें डॉग लवर्स ऑर्गनाइजेशन खाना खिलाते हैं तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या कोर्ट को आंखें बंद करके सब कुछ होने देना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की है कि जो लोग आवारा कुत्तों( Stray Dogs ) को लेकर चिंतित हैं, उन्हें उन्हें अपने घरों में ले जाना चाहिए, बजाय इसके कि उन्हें ‘इधर-उधर घूमने, काटने और जनता को डराने’ दिया जाए।
यह मौखिक टिप्पणी तब आई जब जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ आवारा कुत्तों के मुद्दे( Stray Dogs Case) से संबंधित स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए कुत्ते प्रेमियों और उन्हें खाना खिलाने वालों को भी ‘जिम्मेदार’ और ‘जवाबदेह’ ठहराया जाएगा।
जस्टिस नाथ ने कहा, ‘कुत्तों के काटने से बच्चों या बुजुर्गों की मृत्यु या चोट के हर मामले के लिए हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा वसूलने की मांग करेंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले पांच वर्षों में नियमों के कार्यान्वयन के संबंध में कुछ नहीं किया है। साथ ही इन आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर भी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है, तो आप उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते? ये कुत्ते इधर-उधर क्यों घूमते हैं, लोगों को काटते हैं और डराते हैं?’
जस्टिस मेहता ने न्यायमूर्ति नाथ के विचारों से सहमति जताते हुए कहा, ‘जब कुत्ते 9 साल के बच्चे पर हमला करते हैं तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? क्या उस संगठन को जो उन्हें खाना खिला रहा है? आप चाहते हैं कि हम इस समस्या से आंखें मूंद लें।’
सर्वोच्च अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की बात सुनते समय वह ‘गंभीर सवाल’ उठाएगी। कोर्ट ने याद दिलाया कि पिछली सुनवाई के दौरान कुत्तों के साथ क्रूरता दिखाने वाले वीडियो देखने से मना कर दिया था, यह देखते हुए कि ऐसे वीडियो भी हैं जिनमें कुत्ते बच्चों और बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट 7 नवंबर, 2025 के अपने उस आदेश में संशोधन की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें अधिकारियों को संस्थागत क्षेत्रों और सड़कों से इन आवारा जानवरों को हटाने का निर्देश दिया गया था। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पिछले साल 28 जुलाई को शुरू किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है, जो राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से होने वाले रेबीज, विशेष रूप से बच्चों के बारे में एक मीडिया रिपोर्ट से संबंधित है।


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